
भारत के बिस्मार्क और लोहे पुरुष के नाम से जाने जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल का 31 अक्टूबर 1875 को नाडियाद मे आज ही जन्म हुआ था इनके पिता का नाम झाबेर भाई और माता का नाम लाड बाई था इन्होंने गुजरात के खेड़ा सत्याग्रह में पहली बार स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी 1923 में बोरसाद सत्याग्रह किया जिसमें हदिया नामक कर की समाप्ति हुई थी 1928 में बारदोली आंदोलन किया और इसी आंदोलन में वहां की महिलाओं ने इन्हें सरदार की उपाधि से विभूषित किया 1931 के कांग्रेस की कराची अधिवेशन की अध्यक्षता की जिसमें पहली बार मूल अधिकार संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया उनकी मृत्यु 15 दिसंबर 1950 को हुई थी और 1991 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया यह भारत के पहले उप प्रधानमंत्री गृह और सूचना प्रसारण मंत्री थे
जूनागढ़ रियासत का विलय जनमत संग्रह के आधार पर करवाया गया था
जूनागढ़ के दीवान जिन्होंने बाध्य होकर जूनागढ़ का प्रशासन संभालने हेतु भारत सरकार को आमंत्रित किया था शाहनवाज भूट्टो थे उस समय नवाब महावत खान था बाद मे ये पाकिस्तान भाग गये 20 फरवरी1948 को जनमत संग्रह के आधार पर इनका विलय भारत मे कर लिया गया
हैदराबाद जिसके बारे मे पटेल ने कहा था कि हैदराबाद भारत में पेट के कैंसर के समान है अगर वह स्वतंत्र रहता है तो और इसी कारण ऑपरेशन पोलो चलाकर इनका विलय भी भारत में कर लिया और
बाद मे ओपरेशन पोलो के तहत सैन्य कार्यवाही करके हैदराबाद का विलय भारत में कर लिया गया था यह भारत में मिलने वाली अंतिम रियासत थी उस समय यहां का शासक मीर उस्मान अली था
इन्हें भारत का लौह पुरुष क्यों कहा जाता है इसका एक उदाहरण जोधपुर रियासत के भारत में विलय का है जब
जोधपुर का अंतिम शासक हनुवतं सिहं जिसने भोपाल के नवाब के बहकावे में आकर पाकिस्तान में मिलने का प्रयास किया था जिसका खुलासा सुमनेश जोशी ने अपनी पत्रिका रियासती में किया था जिस समय यह विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर रहा था तब उसने अपनी बंदूक तत्कालीन सचिव वी पी मेनन पर तान दी थी तब सरदार वल्लभभाई पटेल ने कहा था कि अगर यही बंदूक अंग्रेजो के खिलाफ पहले उठाई होती तो हमारा देश कब का आजाद हो गया होता और अगर एक भी गोली चल गई तो शरीर पर गोलिया चलेगी की छेद गिनना मुश्किल हो जाएगा…